चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर जारी राष्ट्रीय राजनीति के मध्य बिहार सरकार में मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर अत्यंत तीखा प्रहार किया है। राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल पर लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कड़ा पलटवार करते हुए बिहार के मंत्री ने कहा कि यदि देश में इतिहास में वास्तव में वोट चोरी नहीं हुई होती, तो स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्थान पर सरदार वल्लभभाई पटेल होते। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को आरंभ से ही जनमत की चोरी करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से खिलवाड़ करने की आदत रही है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए जहानाबाद में मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने विरोधी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और उसके शीर्ष नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्होंने विपक्षी नेतृत्व को अत्यंत कमजोर करार देते हुए कहा कि जब गठबंधन का मुख्य नेता ही वैचारिक और रणनीतिक रूप से दिशाहीन हो, तो अन्य घटक दलों के नेता ऐसी बैठकों में सम्मिलित होकर क्या प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष के बयानों और दावों की कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है और जनता भलीभांति जानती है कि कौन सा दल लोकतंत्र की रक्षा कर रहा है और कौन भ्रम फैला रहा है।
बिहार के चुनावी इतिहास का उल्लेख करते हुए मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने अतीत के चुनावों में व्याप्त हिंसा और बूथ कैप्चरिंग का स्मरण दिलाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पूर्व बिहार में चुनावों के समय खुलेआम बूथ लूटे जाते थे, चुनावी हिंसा में दर्जनों लोगों की हत्याएं कर दी जाती थीं और निर्बल वर्गों को मताधिकार का प्रयोग करने से बलपूर्वक रोक दिया जाता था। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे उस दौर के पुराने वीडियो और अभिलेख देखें ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तविक चुनावी धांधली और वोट चोरी किस कालखंड में हुआ करती थी।
बिहार में वर्तमान कानून व्यवस्था और निष्पक्ष चुनावी माहौल की प्रशंसा करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ और भयमुक्त हुई है। आज बिहार का प्रत्येक नागरिक बिना किसी भय या दबाव के स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहा है और संपूर्ण राज्य में कहीं भी चुनावी हिंसा की घटनाएं नहीं हो रही हैं। इसके बावजूद पराजय के डर से बौखलाया हुआ विपक्ष निराधार आरोप लगाकर संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
संवैधानिक मर्यादाओं और चुनाव आयोग की भूमिका का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार पारदर्शी शासन व्यवस्था प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विपक्ष द्वारा वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर उठाए जा रहे सवालों को उन्होंने पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया। बिहार के मंत्री के इस तीखे बयान के उपरांत प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नया बयानबाज़ी का दौर प्रारंभ हो गया है।