वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global Ratings) और फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत के आर्थिक विकास अनुमान में बढ़ोतरी की है। जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने और मजबूत औद्योगिक गतिविधियों तथा घरेलू मांग के बूते रेटिंग एजेंसियों ने यह सकारात्मक कदम उठाया है। इसके साथ ही बढ़ती मुद्रास्फीति और ऊर्जा लागत के जोखिम को देखते हुए एजेंसियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में कम से कम 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की वृद्धि करने का भी अनुमान जताया है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने ‘इकोनॉमिक एक्टिविटी फॉर एशिया पैसिफिक’ रिपोर्ट में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान को पूर्व के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, फिच रेटिंग्स ने अपनी ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में भारत के विकास दर अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया है। रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निजी निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय भारत को जी20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, विकास दर में बढ़ोतरी के साथ ही मुद्रास्फीति (महंगाई) को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। फिच रेटिंग्स ने उल्लेख किया है कि ऊर्जा और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा खाद्य वस्तुओं की लागत के कारण आने वाले महीनों में अल्पकालिक मुद्रास्फीति दबाव बना रह सकता है। मजबूत मांग और मूल्य वृद्धि के इस संयोजन के कारण फिच ने अनुमान जताया है कि आरबीआई अक्टूबर माह की समीक्षा बैठक में रेपो दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है।
एजेंसियों ने यह भी संकेत दिया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास की गति कुछ हद तक सामान्य हो सकती है, क्योंकि टैक्स रियायतों और त्योहारी सीजन का प्रभाव धीरे-धीरे संतुलित होगा। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत स्थिति मजबूत बनी हुई है और निजी क्षेत्र में पूंजी निवेश की संभावनाएं पहले से अधिक आशाजनक दिख रही हैं।