मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों के मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर राज्य में विगत चार वर्षों से रुकी हुई ओबीसी नियुक्तियों पर गहरा ध्यान आकर्षित किया है। राहुल गांधी ने अपने पत्र के माध्यम से प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और आग्रह किया है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में विलंब के कारण युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को तत्काल समाप्त किया जाए।
अपने पत्र में राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को 27 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के लंबित परिणामों का प्रमुखता से उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि राज्य के लाखों योग्य और प्रतिभावान अभ्यर्थी परीक्षाएं उत्तीर्ण करने अथवा चयन प्रक्रिया में शामिल होने के बाद भी केवल इसलिए नियुक्ति पत्रों से वंचित हैं क्योंकि मामला अदालती प्रक्रियाओं और प्रशासनिक हीलाहवाली में फंसा हुआ है। विगत चार वर्षों से लंबित इन भर्तियों के कारण प्रभावित अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और उनमें गहरा असंतोष व्यापत है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील की है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र अति शीघ्र ठोस और सकारात्मक कदम उठाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश सरकार को माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन मामलों में प्रभावी पैरवी करनी चाहिए ताकि कानूनी अड़चनों को दूर कर आरक्षित पदों पर नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। राहुल गांधी ने बल देकर कहा कि युवाओं को उनका संवैधानिक और सामाजिक हक समय पर मिलना ही चाहिए, क्योंकि रोजगार में अत्यधिक देरी से उनका करियर और आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
राहुल गांधी के इस पत्र के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर पुनः आरंभ हो गया है। जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी ने इसे प्रदेश के करोड़ों ओबीसी युवाओं की न्यायसंगत मांग बताया है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि सरकार नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से सभी भर्तियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। बहरहाल, नेता प्रतिपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए इस पत्र ने राज्य में ओबीसी आरक्षण और रुकी हुई सरकारी भर्तियों के मुद्दे को एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।