पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर पर मुर्शिदाबाद जिले के शक्तिपुर थाने के ठीक बाहर अज्ञात उपद्रवियों ने हमला कर दिया। इस हमले में हुमायूं कबीर और उनके समर्थक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना उस समय घटी जब वे किसी प्रशासनिक कार्य के सिलसिले में थाने पहुंचे थे। पुलिस थाने के समक्ष हुई इस हिंसक वारदात के पश्चात क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
इस घटना पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राजनीतिक हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि किसी भी विचार अथवा मतभेद का अर्थ हिंसा का लाइसेंस नहीं हो सकता। अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में विचारों का अंतर होना स्वाभाविक है, किंतु हिंसा का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मामले में शामिल सभी अपराधियों के विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर पुलिस कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हुमायूं कबीर पर हुए इस जानलेवा हमले के बाद पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विरोधी दलों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि जब राज्य में सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता ही थाने के बाहर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा। विरोधियों का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण इस प्रकार की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
दूसरी ओर, पुलिस ने पूरे मामले की गहनता से जांच प्रारंभ कर दी है। शक्तिपुर पुलिस स्टेशन के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपद्रवियों को शीघ्र ही चिह्नित कर बंदी बनाया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुटबाजी और हिंसक झड़पें लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।