कर्नाटक की राजनीति में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम् के गायन को लेकर लिए गए एक हालिया निर्णय पर संवैधानिक स्तर पर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक औपचारिक पत्र लिखकर सरकार के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का परामर्श दिया है। राजभवन से प्रेषित इस पत्र के सामने आने के पश्चात राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तीव्र हो गई हैं और राजभवन तथा राज्य सरकार के मध्य तनातनी की स्थिति निर्मित हो गई है।
उल्लेखनीय है कि यह विवाद उस समय प्रारंभ हुआ जब कर्नाटक सरकार की ओर से जारी एक आदेश में राष्ट्रीय गीत के कुछ छंदों को संक्षिप्त करने अथवा गायन की समय-सीमा को सीमित करने का निर्देश दिया गया था। सरकार का तर्क था कि कार्यक्रमों में समय प्रबंधन और अन्य औपचारिकताओं को सुचारू बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित विपक्ष के नेताओं ने इस फैसले को राष्ट्रीय गीत के महत्व को कम करने का प्रयास बताते हुए सरकार के विरुद्ध व्यापक विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया था।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने अपने पत्र में राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र रहा है और इसके प्रत्येक शब्द से देशवासियों की देशभक्ति की भावना जुड़ी हुई है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से आग्रह किया कि सरकार किसी भी ऐसे निर्णय पर आगे बढ़ने से पूर्व जनता की धार्मिक एवं राष्ट्रीय भावनाओं का सम्मान करे और इस प्रशासनिक आदेश को वापस लेते हुए इस पर पुनः गंभीरता से विचार करे।
राज्यपाल के इस पत्र के उत्तर में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी और सरकार के मंत्रियों ने अपना पक्ष रखा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार से राष्ट्रीय गीत का अनादर करना नहीं था, बल्कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक सुगमता के लिए लिया गया था। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर आक्रामक रुख अपना रखा है और इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। राजभवन के इस हस्तक्षेप के पश्चात अब यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अपने फैसले को वापस लेती है या कोई नया संशोधन प्रस्तुत करती है।