कर्नाटक में लंबे समय से चली आ रही तुलु भाषा को आधिकारिक मान्यता देने की मांग अब पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक में तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने का फैसला किया। यह दर्जा दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में लागू होगा, जहां तुलु का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार के इस फैसले से तुलु भाषी लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को औपचारिक मान्यता मिली है। यह कर्नाटक कैबिनेट की पहली ऐसी बैठक थी जो बेंगलुरु के बाहर मंगलुरु में आयोजित की गई।
तुलु दक्षिण भारत की प्रमुख द्रविड़ भाषाओं में शामिल है और कर्नाटक के तटीय इलाकों में इसका लंबे समय से भाषाई और सांस्कृतिक महत्व रहा है। तुलु का इस्तेमाल लोककथाओं, रंगमंच, धार्मिक परंपराओं और रोजमर्रा के जीवन में किया जाता है। तुलु भाषी संगठनों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की ओर से लंबे समय से इसे आधिकारिक दर्जा देने की मांग उठाई जाती रही थी। साथ ही तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। फिलहाल कर्नाटक सरकार का नया फैसला राज्य स्तर पर इसे अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने से जुड़ा है, जबकि आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला अलग संवैधानिक प्रक्रिया से संबंधित है।
तुलु को मान्यता देने का मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में भी लंबे समय से चर्चा में रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने 2008 में तुलु को आधिकारिक मान्यता देने और इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए राज्य की ओर से सिफारिश करने का वादा किया था। इसके बाद भी अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में यह मांग उठती रही, लेकिन इसे औपचारिक प्रशासनिक दर्जा नहीं मिल सका। अब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार ने इसे अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता देने का फैसला किया है।
सरकार ने इस फैसले के साथ तटीय कर्नाटक के लिए कई अन्य घोषणाएं भी की हैं। कैबिनेट ने दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर मंगलुरु जिला करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए मसौदा अधिसूचना जारी कर लोगों से एक महीने तक सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे का फैसला लिया जाएगा। सरकार ने तटीय और मलनाड क्षेत्र के लिए अलग पर्यटन नीति को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देना है।
कैबिनेट बैठक में तटीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी करीब 32,611 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें ग्रामीण विकास, पर्यटन, मत्स्य क्षेत्र और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार ने मौजूदा मत्स्य महाविद्यालय को मत्स्य, समुद्री और ब्लू इकोनॉमी विश्वविद्यालय में अपग्रेड करने तथा विद्यार्थियों की संख्या 60 से बढ़ाकर 200 करने की योजना भी मंजूर की है। इसके अलावा पुत्तूर में मेडिकल कॉलेज और शिक्षण अस्पताल स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार पिछली सरकारों ने यह फैसला क्यों नहीं किया, इस पर राजनीति नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा दिए जाने के फैसले को तटीय कर्नाटक की भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है।