कश्मीर घाटी की मस्जिदों में अब धार्मिक विषयों के साथ-साथ समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। इनमें नशे की लत, आत्महत्या और आत्मघाती प्रवृत्ति, मानसिक एवं भावनात्मक तनाव, सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल, कमजोर होते पारिवारिक संबंध और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। यह फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के धार्मिक विद्वानों की हालिया बैठक में लिया गया।
इस बैठक की अध्यक्षता कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने की। बैठक में शिया और सुन्नी समुदायों के कई धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सामाजिक समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों या कभी-कभार होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए लगातार सामुदायिक प्रयास जरूरी हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मस्जिदों और धार्मिक मंचों की समाज में व्यापक पहुंच है। इसलिए इन मंचों के जरिए युवाओं और परिवारों को मानसिक तनाव, अकेलेपन, चिंता और अन्य परेशानियों के शुरुआती संकेत पहचानने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर लोगों को पेशेवर परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि निर्धारित शुक्रवारों को भाग लेने वाली मस्जिदों में एक समान सामाजिक मुद्दे को चर्चा और तकरीर का विषय बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना, परिवारों को समस्याओं की समय रहते पहचान करने में मदद करना और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है।
मस्जिदों और मदरसों को मार्गदर्शन, परामर्श, युवाओं से जुड़ाव और परिवारों की सहायता के लिए अधिक सक्रिय सामुदायिक केंद्रों के रूप में विकसित करने की बात भी सामने आई है। हालांकि धार्मिक विद्वानों ने यह स्पष्ट किया है कि गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद जरूरी है और धार्मिक मंच चिकित्सकीय या पेशेवर परामर्श का विकल्प नहीं हैं।
नशे की समस्या को लेकर भी बैठक में विशेष चिंता जताई गई। धार्मिक विद्वानों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक अभियान को मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर शराब के नए लाइसेंस जारी करने या उनके विस्तार से जुड़ी नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग रखी। यह मांग धार्मिक विद्वानों की ओर से रखी गई है।
इस पहल के तहत धार्मिक विद्वान कश्मीर के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर स्थानीय धार्मिक नेताओं और लोगों से बातचीत करेंगे। उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मौजूद सामाजिक समस्याओं को समझना और क्षेत्र की जरूरत के अनुसार जागरूकता तथा सहायता के उपाय तैयार करना है। 18 सितंबर को मीरवाइज उमर फारूक ने भी लोगों से इस सामाजिक सुधार पहल में सक्रिय भागीदारी की अपील की।