राजस्थान के जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली नगर निगम चुनाव में किसी भी पार्टी को पूरा बहुमत नहीं मिला है और चारों जगह हंग बोर्ड की स्थिति बन गई है। नतीजे आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। भाजपा और कांग्रेस दोनों निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने में जुट गई हैं। जयपुर में कांग्रेस उम्मीदवारों को जिस रिजॉर्ट में ठहराया गया था, वहां कमरे और खाने की कमी को लेकर हंगामा हो गया और कई उम्मीदवार बीच रात रिजॉर्ट छोड़कर घर लौट गए।
राजस्थान में हुए नगर निगम चुनाव के नतीजों ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। राज्य के दस नगर निगमों में से चार, जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया। जोधपुर में मुकाबला सबसे कड़ा रहा, जहां कुल 100 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को बराबर 44-44 सीटें मिलीं।
अलवर में भाजपा ने 28 वार्ड जीतकर बढ़त बनाई जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आईं। अजमेर में कांग्रेस आगे रही, उसे 37 सीटें मिलीं और भाजपा को 32। पाली में भी कांग्रेस 29 सीटों के साथ भाजपा की 21 सीटों से आगे रही। भरतपुर में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इन सभी जगहों पर बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है, क्योंकि दोनों बड़े दलों में से किसी के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं है।
हार-जीत का फैसला अब निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर टिका है, इसलिए हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका बढ़ गई है। इसे रोकने के लिए दोनों पार्टियों ने अपने जीते हुए उम्मीदवारों को रिजॉर्ट में ठहराना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को जयपुर के पास बस्सी क्षेत्र में असिथिरिया रिजॉर्ट में रखा है, वहीं भाजपा ने दिल्ली रोड स्थित भंवर रिजॉर्ट सहित कुछ अन्य जगहों पर अपने उम्मीदवारों को शिफ्ट किया है। मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पूरे होने तक यह व्यवस्था जारी रहने की उम्मीद है।
लेकिन कांग्रेस की इस बाड़ेबंदी में शुरुआत से ही गड़बड़ी सामने आ गई। मालवीय नगर, सांगानेर और बगरू इलाकों से आए उम्मीदवारों ने रिजॉर्ट में कमरों और खाने की कमी की शिकायत की। अलवर के प्रत्याशियों को भी उसी जगह ठहराने से भीड़ बढ़ गई और इंतजाम और बिगड़ गए।
बिना रात का खाना खाए पहुंचे कई उम्मीदवारों को वहां भी समय पर खाना नहीं मिला। नाराज होकर देर रात कई कांग्रेस उम्मीदवार रिजॉर्ट छोड़कर वापस घर चले गए, जबकि कुछ रास्ते से ही लौट गए। महिलाओं और बच्चों के साथ आए परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मेयर चुनाव नजदीक आते ही निर्दलीयों को साधने की कोशिश और तेज होगी और रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर अभी और लंबा चल सकता है।