महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मंत्रालयों और मंत्रियों के कार्यालयों में निर्धारित प्रक्रिया के बिना काम कर रहे करीब 550 कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के बाद मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक, इन कर्मचारियों में ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें प्रतिनियुक्ति, उसनवारी यानी दूसरे विभाग से अस्थायी तौर पर बुलाकर और मौखिक आदेश के आधार पर मंत्री कार्यालयों में काम पर लगाया गया था। इन नियुक्तियों के लिए निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया था और 10 सितंबर तक नियमों के अनुसार नियुक्त नहीं किए गए कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने का निर्देश दिया था।
महायुति सरकार ने मंत्रियों के कार्यालयों के लिए कुल 904 अस्थायी पदों का ढांचा तैयार किया था। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए 164, दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कार्यालयों के लिए 72-72 तथा कैबिनेट मंत्रियों के कार्यालयों के लिए 16 और राज्य मंत्रियों के कार्यालयों के लिए 14 पद निर्धारित किए गए थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय की समीक्षा में सामने आया कि करीब 40 मंत्री कार्यालयों में केवल 549 पद ही निर्धारित प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया के तहत भरे गए थे, जबकि बाकी कर्मचारी दूसरे तरीकों से काम कर रहे थे। अब सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को मूल विभाग में वापस भेजने का फैसला किया है।
इस फैसले से कई मंत्रियों में नाराजगी की बात भी सामने आई है। मंत्रियों का कहना है कि उनके कार्यालयों में निर्धारित 16 कर्मचारियों का ढांचा कई बार काम के लिहाज से पर्याप्त नहीं होता। विधानसभा से जुड़े काम, विभागीय फाइलों का निपटारा, सुनवाई और अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित मामलों को देखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कुछ मंत्रियों ने भरोसेमंद कर्मचारियों को मौखिक या उसनवारी के आधार पर अपने कार्यालयों में लगाया था।
सरकार के नए फैसले के बाद अब मंत्रियों के कार्यालयों में नए कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों की जांच मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर भी की जाएगी। इससे मंत्री कार्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी बढ़ने की संभावना है।
यह फैसला केवल किसी एक दल या मंत्री तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र की महायुति सरकार में शामिल विभिन्न दलों के मंत्रियों के कार्यालयों में काम कर रहे ऐसे कर्मचारियों पर इसका असर पड़ा है। सरकार का तर्क नियमों और निर्धारित नियुक्ति प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना है, जबकि कुछ मंत्रियों को आशंका है कि इससे उनके कार्यालयों की कार्यक्षमता और कर्मचारियों के चयन की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री फडणवीस के इस कदम को मंत्रालयों में नियुक्तियों को अधिक व्यवस्थित और सत्यापन आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार नए कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रिया अपनाती है और क्या मंत्रियों के कार्यालयों में कामकाज के लिए निर्धारित कर्मचारी संख्या में बदलाव किया जाता है।