आधुनिक घरों में साफ-सुथरी बनावट, सादे रंग और कम सामान वाली सजावट पसंद की जाती है, लेकिन कभी-कभी ऐसी सज्जा घर को थोड़ा ठंडा और एक जैसा महसूस करा सकती है। ऐसे में पारंपरिक भारतीय शिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुएं, रंग, बनावट और पुराने डिजाइन तत्व आधुनिक घर में गर्मजोशी, व्यक्तित्व और अपनापन जोड़ सकते हैं।
पारंपरिक सजावट को अपनाने के लिए पूरे घर को पुराने अंदाज में बदलने की जरूरत नहीं है। आधुनिक फर्नीचर और सादे कमरों के साथ कुछ पारंपरिक तत्वों को शामिल करके दोनों शैलियों का संतुलित मेल तैयार किया जा सकता है। इससे घर आधुनिक भी दिखाई देता है और उसमें सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहती है।
पहली शैली पारंपरिक हस्तकला और कढ़ाई वाली सजावट है। कढ़ाई से बने दीवार सजावटी सामान, कपड़े और हस्तनिर्मित कलाकृतियां आधुनिक कमरे में रंग और बनावट जोड़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी हस्तनिर्मित सजावट साफ-सुथरे आधुनिक फर्नीचर के साथ मिलकर कमरे को अधिक व्यक्तिगत और आकर्षक बना सकती है। किसी बड़ी दीवार पर पारंपरिक कढ़ाई वाली कलाकृति को प्रमुख सजावटी केंद्र बनाया जा सकता है।
दूसरी शैली भारतीय हस्तशिल्प और प्राकृतिक सामग्री को शामिल करना है। लकड़ी की नक्काशी, हाथ से बने सजावटी सामान, मिट्टी के बर्तन और प्राकृतिक बनावट वाली वस्तुएं आधुनिक घर में पारंपरिक एहसास ला सकती हैं। इनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करने पर कमरा भरा हुआ नहीं लगता और सजावट में प्राकृतिक गर्माहट बनी रहती है।
तीसरी शैली पारंपरिक भारतीय रंगों और कपड़ों का इस्तेमाल है। आधुनिक घर में बहुत अधिक चमकीले रंगों की जगह मिट्टी जैसे रंग, गहरे हरे, नीले, लाल या हल्के पीले रंगों को पर्दों, कुशन, कालीन या छोटे सजावटी सामान के जरिए शामिल किया जा सकता है। इससे सादे आधुनिक कमरे में जीवंतता आती है, जबकि मूल आधुनिक रूप भी बना रहता है।
चौथी शैली पारंपरिक कला और दीवार सजावट की है। भारतीय लोक कला, पारंपरिक चित्रकारी या विरासत से जुड़े डिजाइन आधुनिक घर की खाली दीवारों को अलग पहचान दे सकते हैं। किसी एक दीवार को ऐसी कलाकृति के लिए चुनना बेहतर हो सकता है, ताकि सजावट आकर्षक रहे और कमरे में बहुत अधिक दृश्य भार न आए।
पांचवीं शैली परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण है। आधुनिक सोफे, सरल मेज और साफ डिजाइन वाले फर्नीचर के साथ पुराने अंदाज की कुर्सी, हस्तनिर्मित कालीन, पारंपरिक दीपक या विरासत से जुड़ी कोई सजावटी वस्तु रखी जा सकती है। इस तरह घर में पुरानी यादों और आधुनिक जीवनशैली दोनों का संतुलन दिखाई देता है।
घर की सजावट में पारंपरिक तत्व शामिल करने का सबसे अच्छा तरीका अपनी पसंद और व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़े सामान चुनना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के घर केवल चलन के अनुसार सजाने की जगह व्यक्ति की पसंद, परिवार की कहानियों और हस्तकला को भी दर्शा रहे हैं। इसलिए किसी पारंपरिक वस्तु को केवल सुंदर दिखने के कारण चुनने के बजाय उससे जुड़ी कहानी या व्यक्तिगत महत्व को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
आधुनिक और पारंपरिक सजावट का यह मेल घर को अधिक आरामदायक और व्यक्तिगत बना सकता है। साफ-सुथरे आधुनिक ढांचे के साथ हस्तनिर्मित वस्तुएं, पारंपरिक कला, कपड़े और प्राकृतिक सामग्री जोड़ने से ऐसा घर तैयार किया जा सकता है जो आधुनिक दिखने के साथ-साथ गर्मजोशी और सांस्कृतिक पहचान भी बनाए रखे।