भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से अपनी-अपनी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतान आसान, तेज और कम खर्चीला बनाया जा सकता है। गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
ब्रिक्स व्यापार मंच के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि सदस्य देशों को एक-दूसरे के बाजारों के लिए अधिक खुलेपन के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को कम करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
गोयल ने भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि यह हर साल 250 अरब से अधिक लेनदेन संभालती है और अब 11 देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत चाहता है कि ब्रिक्स देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़कर सीमा पार डिजिटल भुगतान को और आसान बनाया जाए।
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को अधिक सुविधाजनक बनाना है। अगर अलग-अलग देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियां आपस में जुड़ती हैं, तो कारोबारियों और आम लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की प्रक्रिया सरल हो सकती है। साथ ही, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मौजूदा प्रमुख मुद्राओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने भी सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने ऐसे समाधान विकसित करने की बात कही है जो सुरक्षित, कम लागत वाले और अधिक प्रभावी हों। इसके लिए ब्रिक्स भुगतान कार्यबल को आगे काम करने को कहा गया है।
पीयूष गोयल ने ब्रिक्स के आर्थिक सहयोग को केवल भुगतान व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय व्यापार और निवेश के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने कृषि, दवा उद्योग, वाहन क्षेत्र और सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही। साथ ही स्टार्टअप और महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों को ब्रिक्स की आर्थिक व्यवस्था में अधिक अवसर देने की जरूरत बताई।
भारत की ओर से ब्रिक्स के भीतर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिश ऐसे समय हो रही है, जब समूह सीमा पार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के लिए नए विकल्पों पर चर्चा कर रहा है। भारत की प्राथमिकता किसी एक साझा भुगतान व्यवस्था की बजाय व्यावहारिक तरीके से अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों को जोड़ने और द्विपक्षीय लेनदेन को आसान बनाने पर भी है।
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इस सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश तथा सीमा पार भुगतान जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठने की उम्मीद है।