भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और हौथी हमलों से वैश्विक आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार पर बढ़ती चिंता का असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 742 अंक तक गिरकर 74,160 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 246 अंक टूटकर 23,231 के आसपास आ गया।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी रही। ब्रेंट कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान समर्थित हौथी समूह की गतिविधियों से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगे कच्चे तेल की चिंता बढ़ गई है।
हौथी समूह द्वारा यमन के मोखा बंदरगाह पर नियंत्रण किए जाने की खबर ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। यह क्षेत्र बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस इलाके में तनाव बढ़ने से निवेशकों को आशंका है कि तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की आवाजाही पर असर पड़ सकता है।
महंगे तेल का सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर परिवहन, उत्पादन और दूसरी लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर अधिक सख्त रुख अपनाने की चिंता पैदा होती है। शुक्रवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड पर 10 साल की प्रतिफल दर भी तीन महीने के उच्च स्तर के ऊपर पहुंच गई।
हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट के बाद बाजार ने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी की। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने अपने निचले स्तर से 620 से अधिक अंकों की वापसी की और निफ्टी भी 23,400 के आसपास बंद होने में सफल रहा। बाजार में यह सुधार कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट के साथ पश्चिम एशिया में संभावित अस्थायी समझौते की उम्मीदों से जुड़ा बताया गया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 120.83 अंक गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 79.70 अंक की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। यानी सुबह की भारी गिरावट के मुकाबले दोनों प्रमुख सूचकांकों ने काफी नुकसान की भरपाई की। इसके बावजूद बाजार लगातार वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों के रुख को लेकर सतर्क बना हुआ है।
बाजार में क्षेत्रवार भी दबाव देखने को मिला। धातु, वित्तीय और वाहन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी रही। दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से कुछ ऊर्जा कंपनियों को फायदा मिला और ओएनजीसी तथा ऑयल इंडिया जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली।
विशेषज्ञों के लिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां होंगी। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर बाजार की चिंता फिर बढ़ सकती है।