भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल बीजिंग पहुंच गए हैं। वे दो दिवसीय चीन दौरे पर हैं। मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा के सवाल पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत करेंगे। दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे पर यह 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता होगी।
यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब 12-13 सितंबर को भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भागीदारी को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि चीन ने अभी तक शी जिनपिंग की भारत यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को डोभाल-वांग यी वार्ता की जानकारी देते हुए कहा कि दोनों विशेष प्रतिनिधि सीमा प्रश्न पर गहन चर्चा करेंगे। इसके अलावा द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
विशेष प्रतिनिधि वार्ता भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत का प्रमुख माध्यम है। यह दोनों देशों के लिए आपसी हितों से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद का भी एक अहम मंच है। भारत और चीन के बीच पिछले साल अगस्त में 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई थी। चीन के मुताबिक उस दौरान दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न पर स्पष्ट और विस्तृत चर्चा की थी और कई मुद्दों पर साझा समझ बनाई थी। अब 25वें दौर की बातचीत में दोनों देश अपने नेताओं के बीच बनी सहमति के आधार पर सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाएंगे।
भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद को व्यापक तरीके से हल करने के लिए 2003 में विशेष प्रतिनिधि तंत्र बनाया गया था। अजित डोभाल और वांग यी इस व्यवस्था के तहत अपने-अपने देशों के विशेष प्रतिनिधि हैं। सीमा विवाद का अंतिम समाधान अब तक नहीं निकल सका है, लेकिन दोनों देश इस तंत्र को तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने का महत्वपूर्ण जरिया मानते हैं। अपने बीजिंग दौरे के दौरान डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे।
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और पूर्वी लद्दाख में लंबे सैन्य गतिरोध के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों देशों ने संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। डोभाल-वांग यी वार्ता से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। जयशंकर ने कहा कि 2020 की गर्मियों से 2024 की शरद ऋतु तक दोनों देशों के संबंध बेहद खराब दौर से गुजरे और इसकी मुख्य वजह सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति थी।
उनकी टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में हाल के हफ्तों में चीनी सैनिकों की कथित आक्रामक गतिविधियों की खबरों के बीच आई थी। हालांकि चीन ने 12 अगस्त को दावा किया था कि भारत-चीन सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। भारत ने भी साफ किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है और सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगी।
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी मतभेद जारी हैं। भारत ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के फैसले पर चीन की आलोचना को खारिज किया था। भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस निर्विवाद वास्तविकता को कोई नहीं बदल सकता। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है और 2017 से क्षेत्र के विभिन्न स्थानों के लिए अपनी ओर से नाम जारी करता आया है। भारत इन प्रयासों को निरर्थक बताते हुए लगातार दोहराता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।