भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने सितंबर बुलेटिन में कहा कि देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के व्यापक उपयोग से लोगों को नकदी रखने की जरूरत कम हो रही है। यूपीआई नकदी का विकल्प बनकर उभरा है और इसने भुगतान प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। 2016 में लॉन्च हुआ यूपीआई आज देश की भुगतान क्रांति का मुख्य साधन बन गया है। 2017 में केवल 3 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जबकि 2024 के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 42 करोड़ हो गया है।
अब हर साल यूपीआई के जरिए 200 अरब से ज्यादा लेन-देन हो रहे हैं, जो पूरे डिजिटल पेमेंट्स का लगभग 80% है। केवल वॉल्यूम ही नहीं, बल्कि लेन-देन का मूल्य भी बहुत बड़ा है। वर्तमान में यूपीआई से हर महीने करीब ₹25 ट्रिलियन के लेन-देन हो रहे हैं। RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में देश में सर्कुलेशन में नकदी (CIC) GDP का केवल 11.20% रह गई है, जो नकदी की घटती मांग का स्पष्ट संकेत है।