भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार वर्ष 2025 के दौरान कंपनी प्रमोटरों, प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंड्स तथा शुरुआती चरण के निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग बेचकर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की राशि जुटाई है। ऊँचे वैल्यूएशन और प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की मजबूत मांग के कारण इक्विटी बिक्री में उल्लेखनीय तेजी देखी गई है। चालू वर्ष में आईपीओ के माध्यम से अब तक कुल लगभग ₹1.75 लाख करोड़ जुटाए गए हैं, जिसमें से करीब ₹1.10 लाख करोड़ यानी लगभग 62% राशि मौजूदा शेयरधारकों के पास गई है। इन शेयरधारकों ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी आंशिक इक्विटी बेची है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी प्रमोटरों ने OFS के माध्यम से लगभग ₹95,000 करोड़ जुटाए थे। इस वर्ष आईपीओ की संख्या ने भी नया इतिहास रच दिया है। अठारह वर्ष बाद पहली बार आईपीओ की संख्या 100 के आंकड़े को पार कर गई है, जो प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। सेकेंडरी मार्केट में तेजी और प्राइमरी मार्केट में मजबूत रुचि को देखते हुए प्रमोटर और पीई निवेशक ऊँचे मूल्यांकन पर अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं।
इस प्रवृत्ति से स्पष्ट होता है कि कंपनियों के लिए मौजूदा समय पूंजी जुटाने के लिहाज से अनुकूल है। वर्ष 2026 भी आईपीओ के लिए व्यस्त रहने के संकेत दे रहा है। सेबी के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में आईपीओ लाने के लिए 88 कंपनियों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 104 कंपनियों के आवेदन विचाराधीन हैं। इस तरह करीब 190 कंपनियां 2026 में प्राइमरी मार्केट के जरिए ₹2.50 लाख करोड़ से अधिक जुटाने की तैयारी में हैं।