देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां अगस्त महीने में सत्रह साल से अधिक की ऊँचाई पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों के बीच भी मजबूत घरेलू मांग के कारण उत्पादन क्षेत्र की रफ्तार तेज रही। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई बढ़कर 59.30 के स्तर पर रहा। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा तैयार एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में 59.10 पर था, जो 16 महीनों का उच्चतम स्तर था और अगस्त में और बढ़कर 59.30 हो गया। पीएमआई में 50 से ऊपर का आंकड़ा उस क्षेत्र के विस्तार को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि लगातार पचास महीनों से पीएमआई 50 से ऊपर बना हुआ है।
उच्च घरेलू मांग के कारण फैक्ट्रियों के ऑर्डरों में बड़ी वृद्धि देखने को मिली है। अगस्त का 59.30 पीएमआई कार्य स्थिति को पिछले 17.5 वर्षों में सबसे मजबूत बताता है। नए ऑर्डरों की मात्रा 57 महीनों के उच्चतम स्तर पर रही, जिसके चलते उत्पादन वॉल्यूम में वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे माल की मांग में सबसे अधिक वृद्धि हुई है, उसके बाद कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर गुड्स के उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अमेरिका द्वारा भारत के माल पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के निर्णय के कारण निर्यात ऑर्डरों में मामूली गिरावट आई।
टैरिफ की अनिश्चितता के बीच अमेरिकी आयातकों ने नए ऑर्डर रोक दिए। फिर भी, घरेलू मांग मजबूत होने से अगस्त में टैरिफ का असर सीमित रहा। भावी उत्पादन को लेकर निर्माताओं का आशावाद बरकरार है, जो सकारात्मक संकेत है। हालांकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि पाँच महीनों के निचले स्तर पर रही। भारत के निर्माताओं को एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका के क्लाइंट्स से नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। कच्चे माल की लागत में लगातार वृद्धि होने से तैयार माल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।