चालू वित्तीय वर्ष के दौरान केंद्र सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) के माध्यम से डिविडेंड के रूप में अब तक कुल 41,378 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण आय प्राप्त हुई है। यह राशि बजट में निर्धारित वार्षिक 69,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत है। हालांकि, मौजूदा डिविडेंड आय पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम रही है। पिछले वर्ष इसी अवधि में CPSUs से सरकार को 47,338 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ था, जो उस वर्ष के बजट अनुमान 56,260 करोड़ रुपये का लगभग 84 प्रतिशत था। पूरे वित्तीय वर्ष 2025 में सरकार को डिविडेंड के रूप में रिकॉर्ड 74,129 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी।
वित्तीय वर्ष 2026 में सरकार इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगी, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, मौजूदा वर्ष में विनिवेश और डिविडेंड से होने वाली आय का विशेष महत्व है, क्योंकि जीएसटी दरों में कटौती के कारण केंद्र सरकार की कर आय बजट लक्ष्य से कम रहने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा लाभ तेल विपणन कंपनियों को मिला है। इसके परिणामस्वरूप ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और गेल जैसी कंपनियों ने मजबूत डिविडेंड का भुगतान किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2016 में अब तक 11,340 करोड़ रुपये के साथ सरकार को सबसे अधिक डिविडेंड देने वाले क्षेत्र के रूप में स्थान प्राप्त किया है।
कंपनीवार देखें तो ऊर्जा और खनन क्षेत्र की कंपनियां सरकार के डिविडेंड इनफ्लो में सबसे आगे रही हैं। कोल इंडिया वित्तीय वर्ष 2026 में अब तक 8,132 करोड़ रुपये के साथ सबसे अधिक डिविडेंड देने वाली कंपनी बन गई है। इसके बाद ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) 5,371 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रही है। इसके अलावा नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से 3,479 करोड़ रुपये, एनटीपीसी से 3,023 करोड़ रुपये, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन से 2,873 करोड़ रुपये, पावर ग्रिड से 2,642 करोड़ रुपये, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से 2,182 करोड़ रुपये और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से 1,737 करोड़ रुपये का डिविडेंड योगदान मिला है।