उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के क्रिप्टोकरेंसी बाजार में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। मुद्रेक्स, ज़ेबपे और कॉइनस्विच जैसे घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों में चालू वर्ष के दौरान निवेश में लगभग 30 से 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन एक्सचेंजों पर होने वाले कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम में संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है।
वैश्विक स्तर पर सक्रिय बायनेंस एक्सचेंज में भी 2025 के दौरान संस्थागत निवेशकों की भागीदारी 2024 की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत बढ़ी हुई देखी गई है। क्रिप्टो बाजार में संस्थागत निवेशकों में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI), अल्ट्रा HNI और कॉर्पोरेट संस्थाओं का मुख्य रूप से समावेश होता है। भारत में क्रिप्टो बाजार में नियमन से जुड़ी अनिश्चितता के चलते सेबी द्वारा नियंत्रित संस्थागत निवेशक अभी तक क्रिप्टोकरेंसी कारोबार से दूर बने हुए हैं।
देश में क्रिप्टो अपनाने की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में होने के कारण HNI निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल 2 से 5 प्रतिशत हिस्सा ही क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं, ऐसा एक रिपोर्ट में बताया गया है। घरेलू एक्सचेंजों में अधिकतर कारोबार बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना और रिपल जैसे उच्च लिक्विडिटी वाले क्रिप्टो कॉइनों में केंद्रित देखने को मिलता है।