आने वाले पांच वर्षों में देश में बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र का बड़ा योगदान रहेगा। वर्ष 2025 से 2030 के दौरान भारत की कुल बिजली मांग बढ़कर 817 ट्रिलियन वॉट-ऑवर तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि में से लगभग 20% मांग केवल AI से जुड़े वर्कलोड, विशेषकर डेटा सेंटरों के कारण उत्पन्न होगी। रिपोर्ट के अनुसार 2030 के बाद भी AI क्षेत्र की बिजली मांग ऊंची बनी रहने की संभावना है, क्योंकि तब तक देश की डेटा क्षमता में तेज बढ़ोतरी हो चुकी होगी।
पहले के अनुमान में 2030 में बिजली मांग 661 ट्रिलियन वॉट-ऑवर रहने की बात कही गई थी, लेकिन AI और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के तेज विस्तार के कारण अब यह अनुमान बढ़ा दिया गया है। अगले पांच वर्षों में भारत की कुल बिजली मांग में होने वाली वृद्धि अमेरिका और यूरोप की तुलना में लगभग 30% अधिक हो सकती है। हालांकि इन देशों में भी डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।
माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और गूगल जैसी वैश्विक टेक कंपनियों द्वारा भारत में AI और डेटा सेंटर क्षेत्र में किए गए बड़े निवेशों की घोषणाओं ने बिजली मांग बढ़ने की संभावना को और मजबूत किया है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 से अगले पांच वर्षों में भारत की डेटा क्षमता में पांच गुना वृद्धि हो सकती है। इंटरनेट उपयोग, डिजिटल लेनदेन, मोबाइल डेटा और क्लाउड सेवाओं के तेज विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इन सभी कारकों के साथ AI के प्रसार से आने वाले वर्षों में बिजली क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां और अवसर पैदा होने की संभावना है।