शेयर बाजार में पूरे वर्ष भारी उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके परिणामस्वरूप ₹1 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों की संख्या, जो पिछले वर्ष 97 थी, वर्तमान वर्ष में बढ़कर लगभग 110 तक पहुंच गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों की कुल मार्केट कैप में से लगभग 62% हिस्सेदारी इन 110 लार्ज-कैप कंपनियों के पास है।
पिछले वर्ष ₹1 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली 97 कंपनियां कुल मार्केट कैप का लगभग 60% हिस्सा रखती थीं। लार्ज-कैप कंपनियों की संख्या और मार्केट कैप में हुई वृद्धि इस बात का संकेत देती है कि अस्थिर बाजार परिस्थितियों में निवेशक मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर आय वाली कंपनियों की ओर अधिक झुके हैं।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अनुमानित ₹20.90 लाख करोड़ की मार्केट कैप के साथ शीर्ष स्थान बनाए रखा है, जबकि एचडीएफसी बैंक की मार्केट कैप ₹15 लाख करोड़ को पार कर चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान लार्ज-कैप और मेगा-कैप शेयरों का प्रदर्शन मिड-कैप और स्मॉल-कैप की तुलना में बेहतर रहा है। भले ही सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से धन मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में भी जा रहा हो, फिर भी बाजार के समग्र प्रदर्शन में लार्ज-कैप शेयर अधिक स्थिर और मजबूत साबित हुए हैं।
इस वर्ष बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। उल्लेखनीय है कि इन 110 लार्ज-कैप कंपनियों में से लगभग 20 कंपनियों ने पहली बार ₹1 लाख करोड़ की मार्केट कैप का माइलस्टोन पार किया है। एचपीसीएल, वोडाफोन, भेल, मझगांव डॉक जैसी कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। दूसरी ओर, पिछले वर्ष ₹1 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली 12 कंपनियां वर्तमान वर्ष में फिर से इस सीमा से नीचे फिसल गई हैं, ऐसा रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।