सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि मंदिरों में प्रवेश जाति या संप्रदाय के आधार पर प्रतिबंधित किया गया तो समाज में विभाजन की आशंका बढ़ जाएगी।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि मंदिर सार्वजनिक स्थान हैं और इनमें किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक है। न्यायाधीशों ने कहा कि धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाले किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्य बातें:
- सुप्रीम कोर्ट ने जाति या संप्रदाय आधारित मंदिर प्रवेश प्रतिबंध पर चिंता जताई
- मंदिर सार्वजनिक स्थल हैं, भेदभाव असंवैधानिक
- समाज में विभाजन की आशंका को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
- मामले की सुनवाई जारी, आगे की कार्यवाही में यह टिप्पणी महत्वपूर्ण
यह टिप्पणी उन याचिकाओं के संदर्भ में आई है जिनमें कुछ मंदिरों में प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धार्मिक स्थलों पर जातिगत भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।