न्यूट्रिशनिस्ट्स की सलाह है कि राजमा, चना, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी दालों को हमेशा भिगोकर ही पकाएं। इससे न सिर्फ ब्लोटिंग (पेट फूलना) की समस्या कम होती है, बल्कि शरीर प्रोटीन को बेहतर तरीके से अवशोषित भी कर पाता है।
भिगोने के फायदे:
- ब्लोटिंग कम होती है: दालों में मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स (फाइटिक एसिड) भिगोने से कम हो जाते हैं, जिससे पाचन आसान होता है।
- प्रोटीन अवशोषण बढ़ता है: भिगोने से प्रोटीन की बायोअवेलेबिलिटी बढ़ जाती है, यानी शरीर ज्यादा प्रोटीन इस्तेमाल कर पाता है।
- पोषक तत्व बढ़ते हैं: आयरन, जिंक और अन्य मिनरल्स का अवशोषण बेहतर होता है।
- खाना जल्दी पकता है: भिगोने से दालें नरम हो जाती हैं, इसलिए कम गैस और कम समय में पक जाती हैं।
सही भिगोने का समय (न्यूट्रिशनिस्ट सलाह):
- राजमा (Kidney Beans): 8 से 12 घंटे
- चना (Chickpeas): 8 से 10 घंटे
- लोबिया (Black-eyed Peas): 6 से 8 घंटे
- मूंग दाल: 4 से 6 घंटे
- उड़द दाल: 4 से 6 घंटे
सलाह: रात को सोने से पहले दालें भिगो दें और सुबह इस्तेमाल करें। भिगोने का पानी फेंक दें और ताजा पानी में दाल पकाएं।
न्यूट्रिशनिस्ट्स कहते हैं कि यह छोटी आदत रोजाना अपनाने से पाचन संबंधी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।