बॉन्ड मार्केट में पूंजी जुटाने की गतिविधि में तेज गिरावट दर्ज हुई है, क्योंकि कई बड़ी सरकारी संस्थाओं ने अपेक्षा से कम बॉन्ड इश्यू लाए हैं। स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC), एक्सिस बैंक और सुंदरम फाइनेंस ने मिलकर लगभग ₹14,500 करोड़ ही जुटाए, जबकि बाजार की उम्मीद यह आंकड़ा ₹25,000 करोड़ के आसपास होने की थी। पावर फाइनेंस और नाबार्ड ने अपने शॉर्ट–टर्म बांड इश्यू वापस ले लिए, जिससे बाज़ार की गतिविधि और धीमी हो गई।
नरेश नीति समिति की अगली बैठक में रेपो रेट में कटौती की संभावनाओं के चलते कंपनियां कम ब्याज दरों पर बाद में बॉन्ड जारी करने का फ़ायदा उठाने की रणनीति बना रही हैं। रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया है कि ब्याज दरों में कमी की गुंजाइश अभी खत्म नहीं हुई है। उनके बयान के बाद 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घट गई। बाज़ार सूत्रों के अनुसार नाबार्ड ने इश्यू वापस लिया क्योंकि SIDBI ने 6.74% दर पर 37-महीने के बॉन्ड जारी किए और नाबार्ड को उम्मीद थी कि वह इससे भी कम दर पर बॉन्ड ला सकेगा।
दूसरी ओर, PFC ने 10-वर्षीय बॉन्ड पर 7.08% दर से ₹3,000 करोड़ जुटाए और एक्सिस बैंक ने 7.27% दर पर 10-वर्षीय इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से ₹5,000 करोड़ उगाहे। सुंदरम फाइनेंस ने ₹800 करोड़ जुटाए, जिसमें से ₹240 करोड़ एंकर निवेशकों से मिले। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि नाबार्ड और PFC दोनों 5 दिसंबर की नीतिगत घोषणा के बाद फिर से इश्यू ला सकते हैं।