भारतीय कंपनियों में ‘क्वाइट क्विटिंग’ (Quiet Quitting) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कर्मचारी अब सिर्फ जरूरी काम ही कर रहे हैं, एक्स्ट्रा प्रयास या ओवरटाइम करने से बच रहे हैं, लेकिन पूरी तरह नौकरी छोड़ने की बजाय चुपचाप काम जारी रख रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मैनेजर और HR इस ट्रेंड को रोकने में असमर्थ हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार वर्क प्रेशर, कम सैलरी बढ़ोतरी और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी के कारण वे केवल न्यूनतम प्रयास कर रहे हैं।
क्वाइट क्विटिंग के मुख्य कारण:
- काम का अत्यधिक दबाव और बर्नआउट
- सैलरी और प्रमोशन में असंतोष
- वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर
कंपनियां अब कर्मचारियों की व्यस्तता बढ़ाने और उन्हें मोटिवेट रखने के लिए नई रणनीतियां बना रही हैं, लेकिन अभी तक इसका खास असर नहीं दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहा तो प्रोडक्टिविटी पर बुरा असर पड़ेगा।