पुष्य नक्षत्र, 27 नक्षत्रों में 8वां और सबसे शुभ नक्षत्र है, जिसे ‘नक्षत्रों का राजा’ और ‘अमृत योग’ भी कहते हैं, क्योंकि यह पोषण, समृद्धि और स्थिरता लाता है; इस दौरान सोना-चांदी, वाहन, घर खरीदने और नए काम शुरू करने से सफलता मिलती है, क्योंकि चंद्रमा (धन का देवता) इसमें कर्क राशि में होता है, लेकिन शुक्रवार और बुधवार को इससे बचना चाहिए और विवाह वर्जित है, जबकि रवि पुष्य योग (रविवार) और गुरु पुष्य (गुरुवार) अत्यंत शुभ माने जाते हैं.
पुष्य नक्षत्र क्या है?
अर्थ: “पोषण करने वाला”, “सुख-समृद्धि दाता”.
महत्व: सभी नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ, सौ दोषों को हरने वाला, सफलता और स्थिरता का प्रतीक.
प्रतीक: गाय का थन (पोषण, प्रचुरता का प्रतीक).
स्वामी ग्रह: शनि (शनिवार को इसका प्रभाव अधिक होता है).
अधिदेवता: बृहस्पति (गुरु) (ज्ञान, नैतिकता का प्रतीक).
राशि: कर्क (चंद्रमा की स्वराशि).
क्यों है इतना खास?
चंद्रमा (धन का देवता) इस नक्षत्र में कर्क राशि में होता है, जिससे यह धन और संपत्ति के लिए पवित्र है.
इसमें किए गए कार्य (खरीदारी, निवेश, नए कार्य) लंबे समय तक फलदायक और सफल होते हैं.
क्या करें और क्या न करें?
शुभ कार्य: सोना, चांदी, वाहन, घर की खरीदारी, नई शुरुआत, दान, पूजा.
वर्जित: शुक्रवार (असफलता/उत्पात) और बुधवार (नपुंसक) को इससे बचें; विवाह बिल्कुल न करें.
सर्वश्रेष्ठ योग: रवि पुष्य (रविवार) और गुरु पुष्य (गुरुवार).
पुष्य नक्षत्र में जन्मे लोग:
ईमानदार, परोपकारी, शांत और रचनात्मक.
नेतृत्व क्षमता रखते हैं, जीवन में सुख-सुविधाएं जुटाने में सक्षम होते हैं.
पुष्य नक्षत्र में चांदी खरीदने की परंपरा ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है, क्योंकि इसे धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, जो घर में सुख, समृद्धि और स्थायी संपत्ति लाती है; यह नक्षत्र ‘नक्षत्रों का राजा’ कहलाता है और इसमें खरीदी गई चीजें लंबे समय तक शुभ फल देती हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
चांदी खरीदने के ज्योतिषीय कारण:
लक्ष्मी का प्रतीक: चांदी को धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन चांदी खरीदना घर में उनकी कृपा लाता है।स्थायित्व और शुभता: पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु, खासकर सोना और चांदी, स्थायी और शुभ मानी जाती है, जिससे धन में वृद्धि होती है।
ऊर्जा संतुलन: चांदी चंद्रमा की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है, और पुष्य नक्षत्र में चंद्रमा का प्रभाव शुभ होता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है।
‘राजा’ नक्षत्र: पुष्य को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है, जिसका अर्थ ‘पोषण करने वाला’ है, इसलिए इस दिन निवेश और खरीदारी करना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
इस दिन क्या खरीदें:
सोना, चांदी, वाहन, घर, जमीन, और बही-खाता जैसी चीजें खरीदना शुभ होता है
पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति (गुरु) हैं, जो सभी नक्षत्रों में श्रेष्ठ माने जाते हैं, और इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह शनि हैं, जो इसे स्थिरता और व्यावहारिकता देते हैं; इसलिए, गुरु पुष्य और शनि पुष्य नक्षत्रों में क्रमशः भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शनि देव की पूजा का विधान है, जो शुभ फलदायी होता है.
मुख्य बिंदु:
अधिष्ठाता देवता: बृहस्पति (गुरु).
स्वामी ग्रह: शनि (Saturn).
महत्व: पुष्य नक्षत्र को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है.
पूजा:
गुरु पुष्य: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है.
शनि पुष्य: शनि देव की पूजा और दान-पुण्य किया जाता है.
पुष्य नक्षत्र में पैदा लेने वाले व्यक्ति अपनी मेहनत और लगन से जीवन में आगे बढ़ते हैं। ये मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति होते हैं। ये गैर जरूरी चीज़ों में धन खर्च नहीं करते हैं, धन खर्च करने से पहले काफी सोच विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लेते हैं। ये व्यवस्थित और संयमित जीवन के अनुयायी होते हैं। अगर इनसे किसी को मदद चाहिए होता है तो जैसा व्यक्ति होता है उसके अनुसार उसके लिए तैयार रहते हैं और व्यक्तिगत लाभ की परवाह नहीं करते।
पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra) को ज्योतिष में अत्यंत शुभ और ‘पोषण करने वाला’ माना जाता है, जिसमें खरीदारी (सोना, चांदी, वाहन), नया काम शुरू करना, आध्यात्मिक कार्य (मंत्र जाप, दीक्षा, यज्ञ), भूमि-भवन के कार्य, निवेश, व्यापारिक लेन-देन और उच्च शिक्षा जैसे शुभ और स्थायी परिणाम देने वाले कार्य किए जाते हैं, जबकि विवाह वर्जित है. यह दिन धन, समृद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए बहुत फलदायी होता है.
पुष्य नक्षत्र में किए जाने वाले शुभ कार्य:
खरीदारी: सोना, चांदी, वाहन, घर, नया सामान, रत्न खरीदना बहुत शुभ होता है.आध्यात्मिक कार्य: मंत्र दीक्षा, गुरु धारण करना, यज्ञ, हवन, पूजा, दान (विशेषकर दूध, अन्न, वस्त्र) करना.
व्यापार और वित्त: नए व्यापार की शुरुआत, बड़े वित्तीय लेन-देन, निवेश करना.
शिक्षा और ज्ञान: उच्च शिक्षा, विद्या दान, वेद पाठ शुरू करना.
घर और संपत्ति: भूमि, मकान, भवन से जुड़े कार्य करना.
यात्रा: विदेश यात्रा आरंभ करना.
अन्य शुभ कार्य: लक्ष्मी पूजा, कनकधारा स्तोत्र का पाठ, रिश्ते सुधारने के उपाय करना.
क्या नहीं करना चाहिए:
विवाह: पुष्य नक्षत्र में विवाह करना वर्जित माना गया है, ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती के श्राप के कारण यह अशुभ होता है.
क्यों है यह खास?
पोषण और वृद्धि: पुष्य का अर्थ ही पोषण है, इसलिए इस नक्षत्र में किए गए कार्य स्थायी और विकसित होते हैं.
धन और समृद्धि: चंद्रमा इस नक्षत्र में कर्क राशि में होता है, जो धन और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए यह लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने और धन प्राप्ति के लिए उत्तम है.
संक्षेप में, पुष्य नक्षत्र स्थिरता, वृद्धि और समृद्धि लाने वाले कार्यों के लिए सबसे उत्तम है, जिससे धन, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति होती है
लेखिका : साध्वीजी चिंतन प्रज्ञा श्रीजी