‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर देश में बहस के बीच प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की नई रिपोर्ट ने इस प्रस्ताव के कई बड़े फायदे गिनाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे सरकारी खर्च में भारी कमी आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बार-बार चुनाव होने के कारण सरकार को सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और चुनावी प्रबंधन पर बड़ा खर्च करना पड़ता है। वहीं, एक साथ चुनाव कराने से इन खर्चों में उल्लेखनीय बचत संभव है। इसके अलावा, चुनावी प्रक्रिया में लगने वाला समय भी कम होगा, जिससे शासन और विकास कार्यों में बाधा कम आएगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चुनावी ड्यूटी में बड़ी संख्या में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को लगाया जाता है, जिससे शिक्षा और अन्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। एक साथ चुनाव होने से इस समस्या में भी कमी आएगी।
हालांकि, निर्वाचन आयोग का मानना है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू करने के लिए सुरक्षा और संसाधनों की बड़ी तैयारी की जरूरत होगी। इसके बावजूद, बार-बार चुनाव कराने की तुलना में यह व्यवस्था अधिक किफायती और प्रभावी मानी जा रही है।
इसी बीच, इस प्रस्ताव से जुड़े विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है, जिससे इस पर आगे और विस्तार से विचार किया जा सके।