- केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस ने इस बार राज्य को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया है और चुनाव की कमान खुद राहुल गांधी ने संभाल ली है।
- उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव प्रचार तक, राहुल गांधी हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और रैलियों के जरिए सीधे जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
- राहुल गांधी ने साफ संदेश दिया है कि “यूडीएफ ही केरल की टीम है” और राज्य में बदलाव की लहर का दावा किया है।
- कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रहा है, क्योंकि वह पिछले कई वर्षों से सत्ता से बाहर है।
- हालांकि कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि पार्टी के अंदर की गुटबाजी और असंतोष है, जो टिकट वितरण के समय खुलकर सामने आया है।
- कई नेताओं ने टिकट न मिलने पर नाराजगी जताई है, जबकि कुछ नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने तक की चेतावनी दी है।
- महिलाओं को कम टिकट मिलने का मुद्दा भी उठा है, जहां 90 से अधिक सीटों में बहुत कम महिला उम्मीदवारों को मौका दिया गया, जिससे पार्टी पर सवाल खड़े हुए हैं।
- राहुल गांधी ने टिकट वितरण में सुधार के लिए जातीय समीकरण, सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय फीडबैक को भी शामिल करने पर जोर दिया है।
- कांग्रेस नेतृत्व ने यह भी तय किया है कि लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, ताकि संगठन मजबूत बना रहे और भ्रम की स्थिति न बने।
- केरल में कुल 140 विधानसभा सीटें हैं, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF और वामपंथी LDF के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।
- राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस के पास मौका जरूर है, लेकिन अंदरूनी विवाद और संगठनात्मक कमजोरी उसकी राह मुश्किल बना सकती है।
Home केरल चुनाव 2026: राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की तैयारी तेज, लेकिन अंदरूनी कलह बनी बड़ी चुनौती