वरिष्ठ अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता एच.एस. फुल्का, जिन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी है, आज औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
- राजनीतिक घर वापसी: एच.एस. फुल्का ने लगभग सात साल के राजनीतिक अंतराल के बाद सक्रिय राजनीति में वापसी की है। उन्होंने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।
- दंगा पीड़ितों के मसीहा: फुल्का को 1984 के दंगों के दोषियों, जैसे सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर के खिलाफ कानूनी लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने के लिए जाना जाता है।
- AAP से पुराना नाता: वह 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और 2017 में पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। हालांकि, दंगों के मामलों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने 2019 में AAP और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था।
- भाजपा में शामिल होने का कारण: फुल्का ने बताया कि भाजपा ने हमेशा 1984 के पीड़ितों को न्याय दिलाने के उनके प्रयासों का समर्थन किया है, जिससे वह प्रभावित हुए हैं।
- सम्मान: उन्हें उनके सामाजिक और कानूनी कार्यों के लिए 2019 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।