दिल्ली सरकार ने बजट 2026 पेश करते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ‘स्क्रैपेज फर्स्ट’ EV पॉलिसी 2.0 की घोषणा की है। इस नई नीति का कुल आवंटन ₹200 करोड़ है। नीति का मुख्य फोकस पुरानी प्रदूषणकारी गाड़ियों को स्क्रैप करके उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर है।
EV पॉलिसी 2.0 की प्रमुख सुविधाएं:
- स्क्रैपेज लिंक्ड इंसेंटिव: दिल्ली में रजिस्टर्ड BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल/डीजल गाड़ी स्क्रैप करने पर “Certificate of Deposit” मिलेगा। इसके आधार पर EV खरीदने पर अधिकतम सब्सिडी मिलेगी।
- प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार: ₹15 लाख (एक्स-शोरूम) तक की कार पर ₹1 लाख तक की सब्सिडी (पहले 1 लाख आवेदकों तक सीमित)।
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: फ्लैट ₹10,000 की सब्सिडी।
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (L5M):₹25,000 की सब्सिडी।
- कन्वर्जन ग्रांट: पुरानी पेट्रोल/डीजल कार को EV में बदलने पर ₹50,000।
अन्य बड़े ऐलान:
- रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस: 31 मार्च 2030 तक EV पर 100% छूट (₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर)।
- इलेक्ट्रिक बसें: वर्ष 2026 में 6,130 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। 2029 तक कुल 12,000 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: दिल्ली के सभी 400+ वाहन डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य। 2026 के अंत तक 18,000 चार्जिंग पॉइंट्स का लक्ष्य।
- बैटरी रिसाइक्लिंग: लिथियम-आयन बैटरी के कचरे के लिए नया फ्रेमवर्क। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी नोडल एजेंसी बनेगी और “सेकंड-लाइफ” बैटरी उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
परिवहन विभाग को आवंटन: ₹8,374 करोड़। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर मिडिल क्लास परिवार के लिए EV सस्ती हो और EV चार्ज करना मोबाइल चार्ज करने जितना आसान हो।”
नई नीति में सब्सिडी का भुगतान Aadhaar आधारित e-KYC और Direct Benefit Transfer से होगा, जिससे पुरानी नीति के ₹140 करोड़ लंबित क्लेम्स को तेजी से निपटाया जा सकेगा।
यह पॉलिसी दिल्ली को स्वच्छ परिवहन की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है।