तपस्या की देवी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना आज, विद्यार्थियों और साधकों के लिए अत्यंत फलदायी है चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन, यानी 20 मार्च 2026 को मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। देवी का यह स्वरूप सफेद वस्त्र धारण किए हुए है, जिनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है। मान्यता है कि नारद जी के उपदेश पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी, इसीलिए उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।
पूजा से जुड़े मुख्य बिंदु:
- शुभ मुहूर्त और योग: आज पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है, जबकि अमृत सिद्धि योग सुबह 06:25 से शुरू होकर अगले दिन की सुबह तक रहेगा। विशेष कार्यों की सिद्धि के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:58 तक है।
- प्रिय रंग और भोग: मां ब्रह्मचारिणी को सफेद और पीला रंग अत्यंत प्रिय है। आज के दिन माता को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे लंबी आयु और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- पूजन विधि: साधक को आज सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए। माता को सफेद फूल, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर माता की कथा और आरती करें।
- ज्योतिषीय महत्व: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से कुंडली में मंगल ग्रह के दोष दूर होते हैं। जो लोग करियर या शिक्षा में संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए आज की पूजा आत्मबल और एकाग्रता बढ़ाने वाली मानी जाती है।
- विशेष उपाय: आज के दिन गाय को हरा चारा खिलाना और कन्याओं को उपहार देना विशेष फलदायी बताया गया है।