पुरानी सूजन (Inflammation) से बचने के लिए रसोई के मसालों और सही खान-पान पर दें जोर: डॉ. जयेश शर्मा
रायपुर के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा, जिन्हें इस क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है, ने शरीर में होने वाली ‘क्रोनिक इन्फ्लेमेशन’ (पुरानी सूजन) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार में मिलने वाली हर्बल चाय या सप्लीमेंट्स सूजन का स्थायी समाधान नहीं हैं। असली इलाज हमारे रसोई घर में मौजूद प्राकृतिक खाद्य पदार्थों और सही जीवनशैली में छिपा है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- 90:10 का नियम: डॉ. शर्मा के अनुसार, हमारे आहार का 90% हिस्सा घर में बना प्राकृतिक भोजन होना चाहिए। बाकी 10% में स्नैक्स और विशेष अवसरों (जैसे जन्मदिन) का खाना शामिल हो सकता है।
- आहार का सही संतुलन: नियमित भोजन में 50-55% प्राकृतिक फाइबर और सब्जियां, 20-25% प्रोटीन और 20% साबुत अनाज (Whole Grains) होना अनिवार्य है।
- रसोई के पावरफुल मसाले: हल्दी, मेथी, अदरक, लहसुन और प्याज जैसे भारतीय मसालों में सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखते हैं।
- तेल का दोबारा इस्तेमाल है खतरनाक: डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि खाना पकाने के तेल को दोबारा गर्म करना और बार-बार इस्तेमाल करना सूजन का सबसे बड़ा कारण बनता है। डीप फ्राई करने से बचना सबसे बेहतर है।
- फाइबर का महत्व: फाइबर युक्त आहार आंतों (Gut) के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। प्रोसेस्ड और फास्ट फूड से बचना चाहिए क्योंकि इनमें फाइबर की भारी कमी होती है।