धन की मांग में सुधार और एसेट क्वालिटी में मजबूती के कारण मौजूदा वित्त वर्ष में बैंकों के प्रदर्शन के सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई जा रही है। रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025–26 में बैंकिंग क्षेत्र की ऋण वृद्धि 11.50–12.50% तक रह सकती है, जो पिछले वर्ष के 11% की तुलना में अधिक है। पिछले छह महीनों में कॉर्पोरेट लोन मांग में सुधार आया है और GST दरों में कमी के बाद उपभोग बढ़ने से रिटेल लोन मांग भी तेज हुई है।
बैंकिंग क्षेत्र, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में NPA का स्तर ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम है, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट और भी मजबूत हुई है। फरवरी से अब तक रिजर्व बैंक द्वारा कुल 1% की ब्याज दर कटौती की जा चुकी है और दिसंबर की MPC बैठक में संभावित 0.25% कटौती से लोन उठाव और तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, बढ़ती ऋण मांग के मुकाबले जमा वृद्धि धीमी है, जिससे जमा–ऋण अनुपात 80% के आसपास पहुंच गया है। इस स्थिति में बैंक वाणिज्यिक पेपर सहित अन्य माध्यमों से फंड जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
उच्च सोने के दामों के चलते गोल्ड लोन की मांग तेज हुई है और GST में कमी के बाद ऑटो लोन की मांग भी मजबूत है। वहीं वीज़ा संबंधी समस्याओं के कारण विदेशी शिक्षा लोन की मांग में गिरावट दर्ज हुई है।