दुनिया तेज़ी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर बढ़ रही है, लेकिन इस गति के साथ एक बड़ा चुनौती भी सामने आई है। अनुमान बताते हैं कि AI बूम के चलते स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम बढ़ने की पूरी संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार NVIDIA द्वारा अपनाई गई नई रणनीतियों और AI डेटा सेंटर्स की भारी मांग ने पूरी सप्लाई चेन पर गहरा दबाव डाल दिया है। दुनिया भर की टेक कंपनियाँ अरबों डॉलर AI डेटा सेंटर्स बनाने में खर्च कर रही हैं।
इन सेंटर्स को NVIDIA जैसी कंपनियों से एडवांस GPU चिप्स की आवश्यकता होती है, और ये चिप्स भारी मात्रा में मेमोरी व स्टोरेज कॉम्पोनेंट्स पर निर्भर रहती हैं। AI की तेज़ रफ्तार ने DRAM से लेकर हार्ड डिस्क ड्राइव तक कई सामग्रियों की कमी पैदा कर दी है। अलीबाबा की चेतावनी के अनुसार, मेमोरी चिप्स और स्टोरेज डिवाइस की उपलब्धता वर्तमान क्षमता को देखते हुए अगले 2–3 वर्षों में गंभीर संकट की ओर बढ़ सकती है।
इसके अलावा, NVIDIA अब अपनी AI चिप्स में अधिक लो-पावर LPDDR मेमोरी का उपयोग कर रही है, जिसका उपयोग अब तक मुख्य रूप से स्मार्टफोन निर्माता जैसे सैमसंग और एप्पल करते थे। NVIDIA के इस सेगमेंट में आने से मांग में तेज़ उछाल आया है। DRAM और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) के दाम 2025 की अंतिम तिमाही में 30% और 2026 की शुरुआत में 20% तक बढ़ सकते हैं।
स्मार्टफोन और लैपटॉप के उत्पादन लागत में मेमोरी का हिस्सा 10–25% होता है। मेमोरी की कीमतों में 30% उछाल आने पर डिवाइस की कुल कीमत 5–10% तक बढ़ सकती है। साथ ही, डेटा सेंटर्स में HDD की कमी होने पर कंपनियाँ तेज़ी से SSD की ओर बढ़ रही हैं, जो स्मार्टफोन और लैपटॉप का एक प्रमुख कॉम्पोनेंट है। इससे कंज्यूमर मार्केट में भी कमी और कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
यह सप्लाई संकट सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टरों को भी प्रभावित कर सकता है। कई फैक्ट्रियाँ जो AI चिप्स बनाती हैं, वही ऑटो, इंडस्ट्रियल और डिफेंस चिप्स भी बनाती हैं। उत्पादन का फोकस AI पर शिफ्ट होने से इन सेक्टर्स के लिए भी कॉम्पोनेंट की कमी बढ़ सकती है।