पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार एक नया चेहरा चर्चा में है। स्मृति ईरानी को ‘बंगाल की बेटी’ के रूप में पेश किया जा रहा है। इससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
दरअसल, ममता बनर्जी के ‘बाहरी’ वाले आरोप का जवाब अब स्मृति ईरानी बनकर उभरी हैं। वह धाराप्रवाह बांग्ला बोलकर सीधे लोगों से जुड़ रही हैं।
स्मृति ईरानी अपनी सभाओं में खुद को बंगाल की बेटी बताती हैं। वह कहती हैं कि उनका परिवार बंगाल से जुड़ा रहा है। यही वजह है कि उनका बांग्ला कनेक्शन सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि निजी जीवन से भी जुड़ा है।
इसके साथ ही, वह स्थानीय संस्कृति का भी जिक्र करती हैं। इलिश, कतला जैसी बंगाली चीजों का जिक्र कर वह लोगों से जुड़ने की कोशिश करती हैं। इससे उनका संदेश ज्यादा प्रभावी बन रहा है।
इतना ही नहीं, चुनावी मंचों पर वह बांग्ला भाषा में भाषण देकर खास पहचान बना रही हैं। इससे आम लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ती नजर आ रही है।
वहीं, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी वह आक्रामक रुख अपना रही हैं। कई मामलों में पीड़ितों के साथ खड़े होकर उन्होंने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्मृति ईरानी का यह ‘बांग्ला अवतार’ बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे पार्टी बंगाल की जनता से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव में स्मृति ईरानी अब एक ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के रूप में उभरती नजर आ रही हैं।