पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सभी पार्टियां महिलाओं को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रही हैं।
लेकिन हकीकत कुछ और ही बता रही है। राज्य में महिलाओं की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है, जो युवा महिलाओं के लिए चिंता का विषय बन गया है।
मुख्य बातें:
- पश्चिम बंगाल में महिलाओं की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा
- TMC, BJP और कांग्रेस सभी महिलाओं के लिए नौकरी, आरक्षण और स्वरोजगार के वादे कर रही हैं
- आंकड़ों के मुताबिक युवा महिलाओं में बेरोजगारी सबसे अधिक
- शिक्षा प्राप्त महिलाएं भी नौकरी नहीं पा रही हैं
आंकड़े क्या कह रहे हैं? सरकारी आंकड़ों और विभिन्न सर्वे के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 15-29 वर्ष की युवा महिलाओं की बेरोजगारी दर 25% से ऊपर पहुंच गई है। कई जिलों में शिक्षित महिलाएं भी घर बैठी हैं। जबकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को नौकरी मिलने की दर काफी कम है।
पार्टियों के वादे
- TMC: महिलाओं के लिए 50% सरकारी नौकरियां और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने का वादा
- BJP: महिला आरक्षण का सख्त क्रियान्वयन और नए रोजगार केंद्र खोलने का दावा
- कांग्रेस: OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए विशेष स्कीम और कौशल विकास कार्यक्रम
महिलाओं की नाराजगी महिला संगठनों और युवा लड़कियों का कहना है कि हर चुनाव में वादे तो होते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता। वे मांग कर रही हैं कि पार्टियां सिर्फ वादे न करें, बल्कि ठोस रोजगार नीति बनाएं।
चुनावी असर विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टियां महिलाओं की बेरोजगारी के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेंगी तो महिला वोट बैंक उनसे दूर हो सकता है। पश्चिम बंगाल में महिलाएं निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।