महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए जरूरी डिलिमिटेशन बिल लोकसभा में फेल हो गया है।
इसके बाद सत्ताधारी BJP और मुख्य विपक्षी कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए हैं। दोनों पार्टियां विपक्षी दलों पर ‘घोर विश्वासघात’ का आरोप लगा रही हैं।
मुख्य बातें:
- महिला आरक्षण के लिए जरूरी डिलिमिटेशन बिल लोकसभा में फेल
- BJP और कांग्रेस दोनों ने विपक्ष पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया
- PM मोदी और राहुल गांधी दोनों ने बयान जारी किए
- OBC सब-कोटा और परिसीमन को लेकर विवाद बढ़ गया
BJP का आरोप भाजपा ने कहा कि विपक्षी दलों ने जानबूझकर बिल को पास होने से रोका। PM मोदी के करीबी सूत्रों ने इसे “महिलाओं के साथ विश्वासघात” बताया। पार्टी का कहना है कि डिलिमिटेशन और जनगणना के बिना महिला आरक्षण लागू करना असंभव है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए बिल को अटका रहा है।
कांग्रेस का पलटवार कांग्रेस ने BJP पर आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर OBC महिलाओं के सब-कोटा को शामिल नहीं कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण को सिर्फ दिखावा बना रही है और असल में पिछड़ी, दलित और आदिवासी महिलाओं को हक नहीं देना चाहती। कांग्रेस ने मांग की कि बिल को और समावेशी बनाकर पास किया जाए।
विवाद की वजह मुख्य मुद्दा OBC महिलाओं के लिए 33% सब-कोटा और डिलिमिटेशन (परिसीमन) का है। सरकार कह रही है कि पहले जनगणना और फिर परिसीमन जरूरी है, जबकि विपक्ष तुरंत लागू करने की मांग कर रहा है। इस असहमति के कारण बिल फेल हो गया।
राजनीतिक असर यह घटना 2026 के विभिन्न राज्य चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण मुद्दे को और गर्म कर रही है। दोनों बड़े दल अब एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।