नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों और संस्थानों में रोजाना ‘वंदे मातरम’ गाने को अनिवार्य बनाने वाले केंद्र सरकार के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को ‘प्री-मैच्योर’ (समय से पहले) बताते हुए कहा कि सरकार की यह गाइडलाइन केवल एक सलाह है, इसमें किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
मुख्य बिंदु:
- चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर इस एडवाइजरी के आधार पर किसी के साथ भेदभाव या जबरदस्ती होती है, तभी अदालत दखल देगी।
- जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या अधिसूचना में ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर किसी को बाहर निकालने या दंडित करने का प्रावधान है?
- याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े ने कहा कि दंड का प्रावधान है, हालांकि कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन सामाजिक दबाव जरूर बनेगा।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सर्कुलर में किसी को मजबूर करने या दंड देने की कोई बात नहीं है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान करने के लिए किसी एडवाइजरी की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए।
- कोर्ट ने अंत में कहा कि काल्पनिक आशंकाओं के आधार पर न्यायिक समय बर्बाद नहीं किया जा सकता।
सरकार की ओर से जारी 28 जनवरी 2026 की एडवाइजरी को स्कूलों और सरकारी संस्थानों में राष्ट्रभक्ति जगाने के उद्देश्य से जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस मुद्दे पर आगे कोई सुनवाई नहीं होगी, जब तक कि किसी वास्तविक भेदभाव या जबरदस्ती की शिकायत न आए।