फिनलैंड के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर स्टब ने संकेत दिया है कि भारत ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए युद्धविराम और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्टब ने कहा कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही तनाव कम करने और स्थिति को स्थिर करने के लिए बातचीत और युद्धविराम की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस जटिल त्रिकोणीय संघर्ष में यूरोपीय देशों के साथ-साथ भारत भी समाधान निकालने में सहयोग कर सकता है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि दुनिया के लगभग एक-पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
हाल ही में भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता के बाद कुछ भारतीय ध्वज वाले जहाजों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली थी। जयशंकर ने स्पष्ट किया था कि इसके बदले में ईरान को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया और यह भारत-ईरान के पारंपरिक संबंधों का परिणाम है।
इस बीच अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भी संकेत दिया कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अमेरिका की मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि एशियाई देशों, विशेषकर भारत, की ऊर्जा आपूर्ति इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर करती है।
हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह जलमार्ग केवल अमेरिकी और इजरायली जहाजों के लिए बाधित है, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव के कारण कई देशों के जहाज प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत जैसे देश कूटनीतिक पहल करते हैं, तो इससे क्षेत्र में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।