भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता तभी अंतिम रूप लेगा जब नई टैरिफ संरचना लागू हो जाएगी।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को व्यापार आंकड़ों पर आयोजित एक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नए टैरिफ ढांचे के लागू होने के बाद ही किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वाशिंगटन द्वारा वैश्विक टैरिफ दरों को बहाल किए जाने के बाद ही इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
दरअसल, यह स्थिति उस फैसले के बाद उत्पन्न हुई है जिसमें अमेरिकी अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को रद्द कर दिया था। हालांकि इसके कुछ ही समय बाद ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश जारी करते हुए कुछ टैरिफ उपायों को समाप्त किया और अमेरिका में प्रवेश करने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत का “अस्थायी आयात अधिभार” लगाने की घोषणा की। बाद में इस शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।
वाणिज्य सचिव के अनुसार नई दिल्ली इस समय व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रही है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कई दौर की चर्चा जारी है, लेकिन अंतिम समझौता नई टैरिफ व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही संभव होगा।
इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने टैरिफ को लेकर दबाव बढ़ाने की कोशिश भी की है। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत सहित 15 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ कथित अनुचित विनिर्माण प्रथाओं को लेकर व्यापार जांच शुरू करने की घोषणा की है। यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की जा रही है।
धारा 301 के तहत की जाने वाली जांच अमेरिकी सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि किसी देश की व्यापारिक गतिविधियां अनुचित पाई जाती हैं, तो उसके खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं, आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है या व्यापार समझौतों में दी गई रियायतों को निलंबित किया जा सकता है।
सरकार ने यह भी बताया कि अमेरिका के अलावा भारत अन्य देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ भी व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कई मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, पेरू, चिली, यूरेशियन आर्थिक संघ और इजराइल शामिल हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य भारत के वैश्विक व्यापार नेटवर्क को और मजबूत करना है।