पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा ईरानी नेतृत्व से संपर्क साधने की पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारत को शांति के लिए एक “रचनात्मक आवाज” बनना चाहिए।
संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश को इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम निष्क्रिय होकर चुपचाप नहीं बैठ सकते, भारत को शांति के लिए पहल करनी चाहिए।”
थरूर की यह टिप्पणी उस समय आई है जब प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से पश्चिम एशिया में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर बातचीत की। क्षेत्र में चल रहे तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य, पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा संघर्ष में दोनों पक्षों की कुछ न कुछ जिम्मेदारी है। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के शुरुआती हमलों की आलोचना की, वहीं ईरान द्वारा अन्य देशों पर किए गए हमलों को भी गलत बताया।
थरूर ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति और खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इस संकट को समाप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए।