नवंबर महीने में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के कैश होल्डिंग्स में मामूली गिरावट देखने को मिली, हालांकि बाजार नई ऊंचाइयों पर होने के बावजूद अधिकांश फंड्स में कैश होल्डिंग अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। यह रुझान दर्शाता है कि फंड मैनेजर्स खरीदारी को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
ACE इक्विटीज के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में औसत कैश होल्डिंग नवंबर में 4.68 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर में 4.79 प्रतिशत थी। एब्सोल्यूट टर्म्स में रिजर्व लगभग स्थिर रहा और यह 2.02 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि अक्टूबर में यह 2.03 लाख करोड़ रुपये था। नवंबर में बेंचमार्क इंडेक्स में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स 2.11 प्रतिशत, निफ्टी 1.87 प्रतिशत बढ़ा। मिडकैप इंडेक्स 0.35 प्रतिशत चढ़ा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 3.4 प्रतिशत गिरा।
विश्लेषकों के अनुसार, फंड्स में ऊंचा कैश होल्डिंग यह संकेत देता है कि कई फंड मैनेजर्स अभी भी बाजार वैल्यूएशन को ऊंचा मान रहे हैं। आमतौर पर, वोलैटिलिटी से बचाव के लिए कैश होल्डिंग रखी जाती है, लेकिन लंबे समय तक अधिक कैश बनाए रखने से स्कीम के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसलिए, अधिकांश फंड हाउस तभी निवेश बढ़ाते हैं, जब अर्निंग्स की स्पष्टता और वैल्यूएशन अनुकूल दिखाई देता है।
एसबीआई म्यूचुअल फंड, पराग पारिख, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल और मोतीलाल ओसवाल जैसे बड़े फंड हाउसों ने नवंबर में अपनी कैश पोजिशन थोड़ी कम की है। उदाहरण के तौर पर, एसबीआई म्यूचुअल फंड ने 4.2 प्रतिशत से घटाकर 3.89 प्रतिशत, पराग पारिख म्यूचुअल फंड ने 22.17 प्रतिशत से घटाकर 21.37 प्रतिशत, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल ने 5.33 प्रतिशत से घटाकर 5.01 प्रतिशत, मोतीलाल ओसवाल ने 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.52 प्रतिशत और निप्पॉन इंडिया ने 1.74 प्रतिशत से घटाकर 1.65 प्रतिशत कैश होल्डिंग कर दी।
इसके अलावा, वेल्थ कॉ, कैपिटलमाइंड, ट्रस्ट म्यूचुअल फंड, 360 वन, क्वांटम और बजाज फिनसर्व जैसे फंड्स ने भी कैश रिजर्व में उल्लेखनीय कटौती की है। दूसरी ओर, कुछ फंड्स ने लिक्विडिटी बढ़ाई है और कैश होल्डिंग में इजाफा किया है। इनमें एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, क्वांट म्यूचुअल फंड, एक्सिस म्यूचुअल फंड और कोटक म्यूचुअल फंड प्रमुख हैं।