स्टेबलकॉइन के बढ़ते स्वीकार के साथ वित्तीय लेन-देन में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय लेन-देन में क्रिप्टो का उपयोग करने वाले शीर्ष दस देशों में भारत भी शामिल है। स्टेबलकॉइन ऐसी क्रिप्टोकरेंसी हैं जिनका मूल्य अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जिससे दैनिक लेन-देन में उनका उपयोग आसान हो गया है। भारत में लाखों उपयोगकर्ता अब बचत, सीमा-पार धन हस्तांतरण और रोजमर्रा के भुगतान के लिए डिजिटल एसेट्स का उपयोग कर रहे हैं।
रिटेल गतिविधियों में वृद्धि और डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ते झुकाव के कारण क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते भारत इस सूची में नौवें स्थान पर पहुंचा है। जो स्टेबलकॉइन कभी केवल ट्रेडर्स तक सीमित माने जाते थे, वे अब डिजिटल फाइनेंस का अहम हिस्सा बन गए हैं। जुलाई 2025 में स्टेबलकॉइन का वैश्विक लेन-देन वॉल्यूम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। रेमिटेंस, मर्चेंट पेमेंट्स, सीमा-पार सेटलमेंट और पेरोल जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग ने क्रिप्टो पर भरोसा मजबूत किया है।
हालांकि भारत में अभी स्पष्ट नियामक ढांचा नहीं है, फिर भी क्रिप्टो उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। शीर्ष दस देशों में स्थान मिलना यह दर्शाता है कि डिजिटल फाइनेंस के क्षेत्र में भारत के पास वैश्विक शक्ति बनने की बड़ी क्षमता है। क्रिप्टो के वित्तीय उपयोग में सिंगापुर और अमेरिका शीर्ष स्थान पर हैं। सिंगापुर में स्पष्ट नियम, मजबूत लाइसेंसिंग ढांचा और वैश्विक संस्थागत उपस्थिति के कारण क्रिप्टो लेन-देन बढ़ा है, जबकि अमेरिका को गहरे पूंजी बाजार, विशाल रिटेल आधार और तकनीक के प्रति खुले दृष्टिकोण का लाभ मिला है।