अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को लेकर नया और अधिक सावधान अनुमान जारी किया है। IMF की ताज़ा स्टाफ कंसल्टेशन रिपोर्ट के अनुसार अब भारत के वित्तीय वर्ष 2027 की बजाय वित्तीय वर्ष 2029 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है। यह अनुमान पहले के मूल्यांकन की तुलना में एक वर्ष का विलंब दर्शाता है, जिसका मुख्य कारण GDP वृद्धि में सुस्ती और रुपये में उल्लेखनीय कमजोरी है। IMF का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है, लेकिन विनिमय दर में उतार-चढ़ाव इसके डॉलर-आधारित आकार पर दबाव डाल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत वित्तीय वर्ष 2026 में 4 ट्रिलियन डॉलर का स्तर पार कर लेगा। लेकिन वित्तीय वर्ष 2028 के लिए GDP का नया अनुमान अब 4.96 ट्रिलियन डॉलर है, जो पहले के 5.15 ट्रिलियन डॉलर के अनुमान से लगभग 200 अरब डॉलर कम है। इसके अलावा, 2023 में IMF ने वित्तीय 2028 के लिए 5.96 ट्रिलियन डॉलर का अनुमान जारी किया था, यानी दो वर्षों में कुल आधा ट्रिलियन डॉलर की डाउनवर्ड रिवीजन देखी गई है।
IMF का कहना है कि रुपये का अवमूल्यन GDP के डॉलर मूल्य पर सबसे बड़ी चोट पहुंचा रहा है। अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2026 में रुपया 87 प्रति डॉलर और वित्तीय वर्ष 2027 में 87.7 तक कमजोर हो सकता है। इसके अतिरिक्त IMF ने नाममात्र GDP वृद्धि के अनुमान भी घटाए हैं। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए पहले 11% की तुलना में अब सिर्फ 8.5% वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। IMF के ये नए अनुमान संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने के बावजूद वैश्विक कारक और मुद्रा दबाव डॉलर टर्म्स में विकास की गति को धीमा कर रहे हैं।