टैरिफ सहित बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूत आर्थिक गति बनाए रखेगा, ऐसा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है। संस्थान ने अक्टूबर में दिया गया 6.6% GDP वृद्धि अनुमान यथावत रखा है, जबकि अगले वर्ष का अनुमान 6.4% से घटाकर 6.2% किया है। IMF के अनुसार, रिटेल महंगाई कम है और आने वाले महीनों में स्थिर रहेगी, जिससे RBI को मूल्य नियंत्रण और नीतिगत फैसले लेने में सुविधा होगी। इससे अगले मॉनिटरी पॉलिसी बैठक में ब्याजदर कटौती की संभावना बढ़ सकती है।
IMF ने कहा कि बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। जून तिमाही की समीक्षा करते हुए उसने बताया कि पिछले वर्ष के 6.4% मजबूत ग्रोथ के बाद भी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत ने 7.8% ग्रोथ हासिल की, जो मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत समर्थन का परिणाम है। घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और मजबूत उपभोग गतिविधियाँ आने वाले महीनों में भी ग्रोथ को सहारा देंगी। हाल ही में कई वैश्विक और घरेलू एजेंसियों ने भारत के ग्रोथ आउटलुक को बढ़ाया या स्थिर रखा है।
सरकार द्वारा GST में कटौती के बाद त्योहारों के दौरान उपभोग में उछाल देखने को मिला, जिसके कारण कई संस्थाओं ने अपना अनुमान सुधारा है। नवंबर में मूडीज़ ने भारत का GDP ग्रोथ चालू वर्ष के लिए 6.4% और अगले वर्ष के लिए 6.5% अनुमानित किया है। उसका कहना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, बढ़ता उपभोक्ता खर्च और निर्यात में विविधता भारत की ग्रोथ को मजबूत बनाएगी।
S&P ग्लोबल ने 2025-26 के लिए 6.5% ग्रोथ अनुमान यथावत रखा है और अगले वर्ष के लिए 6.7% की भविष्यवाणी की है। कर कटौती और नरम मौद्रिक नीति से उपभोग आधारित ग्रोथ तेज़ होगी, ऐसा उनका मानना है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने भी अपना अनुमान बढ़ाकर चालू वर्ष के लिए भारत का ग्रोथ 7% किया है, जो पहले दिए गए 6.3% से अधिक है। RBI ने फिलहाल 6.8% ग्रोथ का अनुमान रखा है।