देश की बैंकों के लिए फीस आधारित आय अब लाभप्रदता का प्रमुख स्तंभ बनती जा रही है। ब्याज मार्जिन (NIM) और ट्रेजरी आय पर बढ़ते दबाव के बीच, फीस आय में वृद्धि बैंकों के कुल लाभ में अहम योगदान दे रही है। SBI और HDFC बैंक ने हाल के तिमाही परिणामों में फीस आय में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।
RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती के चलते NIM पर दबाव बढ़ा है, जबकि ट्रेजरी से आय में कमी आई है। ऐसे में फीस आधारित आय बैंकों के लिए स्थायी लाभ का विकल्प बन गई है। बैंक अब क्रॉस-सेलिंग पर जोर दे रहे हैं, जिससे नॉन-फंड आधारित आय बढ़ाई जा सके। जिन बैंकों की डिपॉजिट लागत अधिक है, वे फॉरेक्स और फीस आय पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। कुल मिलाकर, फीस आय में वृद्धि अब बैंकों की रणनीतिक नीतियों का मुख्य हिस्सा बन गई है।