भारत में प्राइवेट इक्विटी (PE) कंपनियां अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभर रही हैं और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। देश में प्राइवेट इक्विटी की पैठ अभी सीमित है, लेकिन भारत पिछले तीन वर्षों से विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के लिए अपार संभावनाएं हैं।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत वैश्विक प्राइवेट इक्विटी निवेश की मांग में अग्रणी बनने की क्षमता रखता है। कई वर्षों से भारत वैकल्पिक निवेश के लिए विश्व का सबसे तेज़ी से विकसित होता बाजार रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि देश ने अपेक्षाकृत छोटे स्तर से शुरुआत की थी, जिससे प्राइवेट इक्विटी अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाई थी। अब मजबूत डेटा और रुझान यह संकेत देते हैं कि भारत प्राइवेट इक्विटी निवेश का मुख्य केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
पारंपरिक रूप से बैंक, बीमा कंपनियां और म्यूचुअल फंड वित्तीय क्षेत्र के मुख्य स्तंभ रहे हैं। फिर भी, पिछले 25 वर्षों में प्राइवेट इक्विटी ने सार्वजनिक बाजारों की तुलना में औसतन 6.7% अधिक रिटर्न दिया है। वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में निवेश 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है, जो दर्शाता है कि प्राइवेट इक्विटी अब वैश्विक वित्तीय प्रवाह का एक अहम हिस्सा बन गई है। भारत में भी सौदों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
भारत का आर्थिक तंत्र अधिक गतिशील बन रहा है और यहां के फंड व वेल्थ मैनेजरों को अब स्थानीय पूंजी की बड़ी उपलब्धता है। अति-धनवान व्यक्तियों और परिवार कार्यालयों द्वारा अपने निवेश का एक हिस्सा प्राइवेट इक्विटी में फालना बढ़ा रहे हैं। फिलहाल यह आवंटन 7-8% के बीच है, लेकिन आने वाले समय में इसके 15-16% तक पहुंचने की उम्मीद है।