वर्ष 2025 में विश्वभर में सोने की खरीद में तेज़ी आई है। साल की शुरुआत से अब तक सोने के दामों में लगभग 48% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उछाल के प्रमुख कारणों में विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा निरंतर सोने की खरीद, वैश्विक राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताएँ शामिल हैं। सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसानी से व्यापार योग्य है और दीर्घकालिक रूप से स्थिर रिटर्न देता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक विश्व के केंद्रीय बैंकों के पास कुल 36,359 टन सोना मौजूद था।
सबसे अधिक सोना अमेरिका के पास है — लगभग 8,133 टन। इसके बाद जर्मनी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), इटली और फ्रांस का स्थान है। भारत 888 टन सोने के साथ विश्व में नौवें स्थान पर है, जबकि जापान 846 टन के साथ दसवें स्थान पर है। भारत ने वर्ष 2025 में अब तक कुल 3.8 टन सोना खरीदा है — जिसमें जनवरी में 2.8 टन, मार्च में 0.6 टन और जून में 0.4 टन की खरीद शामिल है। इस कदम से भारत के स्वर्ण भंडार को मजबूती मिली है और यह स्पष्ट होता है कि भारत दीर्घकाल में सोने को सुरक्षित निवेश मानना जारी रखे हुए है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 15 टन सोना अपनी होल्डिंग में जोड़ा।
कज़ाख़स्तान का नेशनल बैंक लगातार छठे महीने सोना खरीद रहा है और उसके पास अब 316 टन सोना है। बुल्गारिया ने भी अगस्त में 2 टन सोना जोड़ा — जो जून 1997 के बाद से उसका सबसे बड़ा मासिक इज़ाफ़ा है। इसी तरह चीन का पीपुल्स बैंक लगातार दसवें महीने सोना खरीद रहा है। वर्तमान में उसके पास 2,300 टन से अधिक सोना है, जो उसके कुल विदेशी भंडार का लगभग 7% है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविधीकृत करने के उद्देश्य से सोने में निवेश बढ़ाते रहेंगे।