भारतीय कंपनियों में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस वर्ष अब तक 185 से अधिक कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के समक्ष अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किए हैं। लगभग हर कारोबारी दिन किसी न किसी नई कंपनी द्वारा IPO आवेदन दाखिल किया जा रहा है, जिससे स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में प्राथमिक बाजार अत्यंत व्यस्त रहने वाला है। प्राइम डेटाबेस के आँकड़ों के अनुसार, एक ही वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में DRHP दाखिल होने का रिकॉर्ड पिछली बार 1997 में बना था — जो भारतीय IPO बाज़ार का ‘स्वर्णकाल’ माना जाता है।
इस वर्ष दाखिल किए गए DRHP की संख्या 2023 और 2024 के पहले नौ महीनों की कुल आवेदनों से भी अधिक है, जो लिस्टिंग के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। आम तौर पर IPO फाइलिंग से लिस्टिंग तक का समय पांच से बारह महीने का होता है। ऐसे में वर्तमान आवेदनों को देखते हुए, वर्ष 2026 भारतीय IPO बाजार के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हो सकता है। बाजार की अस्थिरता के बावजूद, कंपनियों ने इस साल IPO के माध्यम से ₹1.1 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई है, जो 2024 में दर्ज ₹1.6 लाख करोड़ के रिकॉर्ड को पार कर सकती है। दाखिल किए गए 185 DRHP के माध्यम से कुल ₹2.72 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। टाटा कैपिटल, एलजी इलेक्ट्रिक, लेंसकार्ट, फोनपे, फिजिक्सवाला और पाइन लैब जैसी बड़ी कंपनियाँ भी आने वाले महीनों में IPO लाने की तैयारी में हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि IPO के प्रति यह उत्साह कई कारकों के कारण है। एक ओर घरेलू निवेशक हर साल लगभग ₹3 लाख करोड़ का निवेश बाजार में कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर तकनीक, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लिस्टिंग के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में IPO के सफल प्रदर्शन, छोटे शहरों में बढ़ती निवेश जागरूकता और अनुकूल मूल्यांकन के चलते DRHP फाइलिंग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। पहले जहाँ छोटे शहरों की प्रोमोटर-प्रबंधित कंपनियाँ लिस्टिंग को लेकर हिचकिचाती थीं, वहीं अब वे भी बाजार की तेजी का लाभ उठाने के लिए आगे आ रही हैं।