भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 11 साल में पहली बार डॉलर की खरीद नहीं की। फरवरी 2014 के बाद यह पहला मौका था जब जुलाई 2025 में RBI ने फॉरेक्स स्पॉट मार्केट से एक भी डॉलर खरीदा नहीं। इसके बजाय, रुपया पर दबाव बढ़ने के बीच करेंसी को स्थिर रखने के लिए RBI ने 2.54 अरब डॉलर बेचे। इस कदम के चलते भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 जुलाई को $699.73 अरब से घटकर 1 अगस्त को $688.87 अरब रह गया।
जुलाई महीने में रुपया 2.23% टूटा, जो 2025 का सबसे बड़ा मासिक गिरावट थी। साल की शुरुआत से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 3.48% कमजोर हुआ है, जो पिछले दो वित्तीय वर्षों के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। डॉलर न खरीदकर उल्टा बेचने की RBI की यह रणनीति उसके दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देती है। अब वह रिज़र्व बढ़ाने से ज्यादा करेंसी स्थिरता पर ध्यान दे रहा है। स्पॉट और फॉरवर्ड दोनों बाज़ारों में हस्तक्षेप करके रुपया स्थिर रखने की कोशिश की गई।
बाहरी कारक जैसे टैरिफ का दबाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़राइल-ईरान तनाव ने रुपये पर असर डाला। खासकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाने के बाद डॉलर की आवक में गिरावट दर्ज हुई। हालांकि, अमेरिकी फार्मा सेक्टर पर टैरिफ लगने के बावजूद रुपया स्थिर रहा। एफपीआई की बिकवाली के बीच डॉलर इंडेक्स में गिरावट और क्रूड के दाम नरम रहने से रुपये को सहारा मिला। इसके बावजूद, साप्ताहिक आधार पर रुपया 0.8% गिरा, जो पिछले एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट रही।