जो होम लोन पहले सुरक्षित माने जाते थे, वे अब दबाव में आ गए हैं। खासकर एफोर्डेबल हाउसिंग लोन में बढ़ते डिफॉल्ट के कारण वित्तीय संस्थाएं इन्हें एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) को बेच रही हैं। जून 2025 की तिमाही में ARCs ने रिटेल स्ट्रेस्ड एसेट्स खरीदने के लिए ₹1,713 करोड़ की सिक्योरिटी रिसीट्स जारी कीं, जो पिछले साल से 245% अधिक है। इनमें ज्यादातर छोटे आकार की होम लोन शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक बैंकों में डिफॉल्ट बढ़ा है, जहां 31–90 दिन बकाया भुगतान का 2.85% वसूला नहीं गया। यह दबाव ₹35 लाख से कम की लोन में ज्यादा है। NBFCs और निजी बैंक इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जबकि सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी घटी है। पिछले दो वर्षों में उनके लिए होम लोन ग्रोथ केवल 10% रही, जबकि 2022–23 में यह 13–17% थी।